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रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते सेंसेक्स में इतिहास की चौथी सबसे बड़ी गिरावट, Sensex में 2700 अंक और निफ्टी 16,300 प्वॉइंट्स गिरा BSE Sensex में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई है।

नई दिल्ली | गुरुवार सुबह रूस-यूक्रेन के बीच जंग शुरू हो चुकी है। युद्ध के कारण शेयर बाजार में सुबह सें गिरावट शुरू हो गयी है। सेंसेक्स में इतिहास की चौथी सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। BSE Sensex में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई है। NSE Nifty 5 फीसदी नीचे गिर गया है। भारतीय बेंचमार्क इंडैक्स में आज सातवें लगातार सत्र में गिरावट देखी गई है। निफ्टी 16,300 प्वॉइंट्स के आंकड़े के नीचे रहा है।

शेयर बाजार के बंद होने के समय, सेंसेक्स 2,702.15 प्वॉइंट्स या 4.72 फीसदी गिरकर 54,529.91 पर रहा. जबकि, निफ्टी 815.30 अंक या 4.78 फीसदी की गिरावट के साथ 16,248.00 पर पहुंच गया था। आज की इस गिरावट से निवेशकों को करीब 13.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. करीब 240 शेयरों में तेजी देखी गई है. जबकि, 3084 शेयर नीचे गिर गए हैं. वहीं, 69 शेयरों में कोई बदलाव नहीं आया है।

ज्यादा नुकसान में है यह कंपनी
निफ्टी 50 पर सभी शेयर गिरावट में बंद हुए. टाटा मोटर्स, इंडसइंड बैंक, यूपीएल, ग्रासीम इंडस्ट्रीज और अडाणी पोर्ट्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. सभी सेक्टर के इंडैक्स 3 से 8 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए हैं. जबकि, बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडैक्स में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक-
बाजार के जानकारों का कहना है कि, यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान के बीच ब्रेंट क्रूड के सात सालों के समय में पहली बार 100 डॉलर के आंकड़े को पार करने के साथ, दोनों बेंचमार्क इंडैक्स में 5 फीसदी की गिरावट देखी गई है. सभी सेक्टोरल इंडैक्स गिरावट के साथ बंद हुए हैं. इससे निवेशकों की 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की दौलत का नुकसान हुआ है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एडवांस-डिक्लाइन रेश्यो को देखने पर पता चलता है कि आज देखी गई इस अनिश्चित्ता की स्थिति से दोनों निवेशकों और ट्रेडर्स को नुकसान पहुंचा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था क्या होगा असर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूस-यूक्रेन के बीच तनाव लंबे समय तक चलने से मुद्रास्फीति का दबाव आगे भी बना रह सकता है. इससे आर्थिक ग्रोथ के लिए दुनिया भर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था के नजरिये से आर्थिक असर छोटी अवधि के लिए देखा जा सकता है, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था लंबी अवधि के आधारभूत ग्रोथ प्रोस्पेक्टस से निर्धारित होगी।

यूरोपीय शेयरों में करीब 3 फीसदी की गिरावट देखी गई है. बैंक ऑटो कंपनियों के शेयरों में वहां सबसे ज्यादा नुकसान देखा गया है. STOXX 600 इंडैक्स करीब 2.9 फीसदी गिरा है. जनवरी की रिकॉर्ड ऊंचाई से इसमें 10 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

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