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रूस के इस चैनल के पूरे स्टाफ ने दिया इस्तीफ़ा, सरकार ने यूक्रेन कवरेज पर लगा दी थी रोक चैनल के फाउंडिंग मेंबर नतालिया सिंधेवा ने फाइनल टेलीकास्ट में युद्ध का विरोध किया और सभी स्टाफ मेंबर्स ने वाकआउट कर दिया।

नई दिल्ली | यूक्रेन पर रूस द्वारा लगातार किये जा रहे हमलों के बीच रूस के एक चैनल ‘TV RAIN’ के पूरे स्टाफ ने फ़ाइनल टेलीकास्ट के दौरान ऑन एयर इस्तीफ़ा दे दिया। बताया जा रहा है कि स्टाफ ने फाइनल टेलीकास्ट के दौरान युद्ध को रोकने का अह्वान किया मगर रूस के उच्चाधिकारियों ने रूस द्वारा यूक्रेन पर किये जा रहे हमले की कवरेज को ससपेंड कर दिया।

चैनल के फाउंडिंग मेंबर नतालिया सिंधेवा ने फाइनल टेलीकास्ट में युद्ध का विरोध किया और सभी स्टाफ मेंबर्स ने वाकआउट कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैनल ने अपने बयान में कहा कि ऑपरेशन अनिश्चित काल के सस्पेंड कर दिया गया है।

चैनल ने, कर्मचारियों के बाहर निकलने के बाद, ‘Swan Lake’ ballet वीडियो चलाया, जिसे 1991 में सोवियत संघ के विघटन के वक्त रूस में सरकारी टीवी चैनलों पर दिखाया गया था। चैनल में चलने के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

रूस के कुछ बचे हुए लिबरल मीडिया आउटलेट्स में से एक, Ekho Moskvy रेडियो स्टेशन को भी यूक्रेन पर रूसी हमले की कवरेज देने के लिए बोर्ड द्वारा भंग कर दिया गया है।

रेडियो स्टेशन में यूक्रेनी पत्रकारों के इंटरव्यू दिखाए गए हैं, जिन्होंने रूस द्वारा किए जा रहे हमले के खतरनाक नतीजों पर बात की थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एडिटर-इन-चीफ Alexei Venediktov ने कहा कि स्टेशन स्वतंत्र एडिटोरियल लाइन को नहीं छोड़ेगा क्यूंकि ये तीन दशकों से उसकी पहचान है। उन्होंने अपनी एडिटोरियल एडिटोरियल नीतियां नहीं बदलने का एलान किया।

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रूस द्वारा बैन लगाने के बाद एक बयान में कहा कि रूस की सरकार ट्विटर, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी गला घोंट रही है क्योंकि इससे रूस के लाखों नागरिक स्वतंत्र जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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