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WhatsApp के इस नए फीचर से होगी जालसाजों की छुट्टी, जानिए कैसे करेगा काम यूज़र के फोन पर अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की घंटी नहीं बजेगी. हालांकि, वे मिस्ट कॉल के रूप में कॉल लिस्ट में ज़रूर दिखाई देंगे

वॉट्सऐप पर स्पैम कॉल्स में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अनजान नंबर से कॉल करके जालसाज लोगों के साथ ठगी को बड़े आसानी से अंजाम दे रहे हैं. इसलिए सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए मेटा ने एक नया फीचर पेश कर दिया है. ये फीचर यूज़र्स को प्लेटफॉर्म पर स्पैस कॉल्स को ऑटोमैटिकली म्यूट करने की अनुमति देगा. ये एक प्राइवेसी फीचर है, और इसका नाम ‘Silence Unknown Callers’ रखा गया है.

वॉट्सऐप का दावा है कि इस नए फीचर का मकसद यूज़र्स को उनकी इनकमिंग कॉल पर ज़्यादा कंट्रोल प्रदान कराना है, और ये स्पैम, स्कैम और अनजान कॉलर्स के खिलाफ बेहतर सुरक्षा देने में मदद करेगा.

मेटा के CEO मार्क ज़करबर्ग ने इस फीचर का ऐलान किया है. बता दें कि ये फीचर कुछ समय से बीटा टेस्टिंग पर था, और अब इसका स्टेबल वर्जन Android और iOS दोनों यूज़र्स के लिए उपलब्ध करा दिया गया है. अगर आप इस फीचर को प्राइवेसी सेटिंग में जाकर ऑन कर देते हैं, तो उसके बाद जब भी किसी अनजान नंबर से कॉल आएगा तो वह अपने आप साइलेंट हो जाएगा.

ऐसे करेगा काम
यूज़र के फोन पर अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की घंटी नहीं बजेगी. हालांकि, वे मिस्ट कॉल के रूप में कॉल लिस्ट में ज़रूर दिखाई देंगे, जिससे यूज़र्स बाद में उसे रिव्यू कर सके कि वह ज़रूरी कॉल तो नहीं था.

अगर आप इस फीचर का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो सुनिश्चित करें कि आपने अपने फोन पर वॉट्सऐप का लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर लें. एंड्रॉयड यूज़र ऐप को Google Play Store और iOS यूज़र्स Apple ऐप स्टोर में जाकर अपडेट कर सकते हैं.

अब आपको वॉट्सऐप ओपेन करना होगा, और मेनू में जाकर सेटिंग सेलेक्ट करना होगा. फिर Privacy सेलेक्ट करके Call सेलेक्ट करें. यहां ‘Silence Unknown Callers’ को एनेबल यानी कि ऑन कर दें.

 

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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