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उत्तर प्रदेश में लोक कलाओं और कलाकारों को सहेजने का प्रयास आगरा में 18 विधाओं से जुड़े कलाकारों की तलाश शुरु हो गई है। इन कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए मौका मिलेगा और प्रोत्साहन भी मिलेगा।

22 अगस्त । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विलुप्त होती लोक कलाओं को लेकर बेहद संजीदा है। शहर, गांव से लेकर मोहल्लों में ढेरों प्रतिभाएं हैं, लेकिन उनके अंदर विभिन्न कला से संबंधित प्रतिभा बिना प्रोत्साहन और मंच के आगे नहीं बढ़ पाती है। सरकार ने प्रदेश भर के सभी जिलों में से ऐसे ही पारम्परिक हुनरमंद युवाओं को मौका देने के लिए एक बड़ी पहल की है। आगरा में 18 विधाओं से जुड़े कलाकारों की तलाश शुरु हो गई है। इन कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए मौका मिलेगा और प्रोत्साहन भी मिलेगा। यह 18 विधाएं देश की संस्कृति से जुड़ी हुई है जो सदियों से भारतीयों की आत्मा भी कही जाती हैं।

सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में पारंपरिक युवा कलाकारों को खोज निकालने का लिया निर्णय। 

युवा कल्याण विभाग देगा मंच
जिला युवा कल्याण विभाग द्वारा 18 विधाओं में से किसी भी एक विधा में पारंगत या हुनरमंद युवाओं की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए गांव और शहरों में युवा कल्याण विभाग के अधिकारी और प्रतिनिधि कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायतों में भी हुनरमंद युवाओं की तलाश के लिए संदेश भेजा जा रहा है। ग्राम प्रधान व सचिव के माध्यम से हुनरमंद युवाओं की पहचान हो रही है। जिन युवाओं की पहचान होगी उनके हुनर को आगे बढ़ाने के लिए युवा कल्याण विभाग एक मंच भी प्रदान करेगा और उन्हें प्रोत्साहित करके आगे बढ़ाएगा। इन युवा कलाकारों को खोजने की जिम्मेदारी जिला युवा कल्याण विभाग को दी गई है।

दर्जनभर से अधिक विधाओं से जुड़े कलाकारों की हो रही तलाश

हुनरमंद युवाओं की तलाश
जिला युवा कल्याण अधिकारी जयपाल सिंह सागर ने बताया कि सरकार पारम्परिक लोक कलाओं को सहेजने से पूर्व उसे जीवित रखने वाले कलाकारों को मंच देने की तैयारी में है। इसके लिए युवाओं की तलाश, उनकी पहचान गांव और शहर हर जगह की जा रही है। युवा कल्याण विभाग जिन 18 विधाओं में हुनरमंद युवाओं की तलाश कर रही है उसमें लोक नृत्य, लोकगीत, एकांकी और भारतीय क्लासिकल वोकल भी शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक वोकल, सितार वादन, बांसुरी वादन, तबला वादन में पारंगत युवाओं को भी मौका दिया जाएगा। वीणा वादन, मृदंग, हारमोनियम, लाइट, गिटार वादन करने वाले युवा भी इस तलाश में शामिल है। जबकि मणिपुरी नृत्य, ओडिसी नृत्य, भरतनाट्यम नृत्य, कत्थक नृत्य, कुचिपुड़ी नृत्य, एक्सटेम्पोर की विधा में पारंगत युवाओं को बड़े स्तर पर ले जाने में सहयोग और मंच युवा कल्याण विभाग प्रदान करेगा।

15 से 29 वर्ष तक के कलाकारों को मिलेगी प्राथमिकता

ऑनलाइन साझा की जानकारी
उन्होंने बताया कि लोक कलाकारों को पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध भी किया जा रहा है। जिले भर से बड़ी संख्या में युवाओं ने विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन अपनी जानकारी साझा की है। इसमें 15-29 वर्ष तक के कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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