Zindademocracy

जगन्नाथ पुरी हेरिटेज कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर विवाद के लिए BJP नेता ने ASI को ठहराया ज़िम्मेदार महापात्र ने ASI पर अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से पूरी न करने का आरोप लगाया।

ओडिशा | पुरी हेरिटेज कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर सत्तारूढ़ बीजू जनता दल और विपक्षी भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है। इसी विवाद को लेकर BJP नेता बिजय महापात्र ने ASI यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर निशाना साधा है। इन्होने ASI को, हुई गड़बड़ी के लिए ज़िम्मदार ठहराया है।

पूरे कॉरिडोर परियोजना प्रकरण की CBI जांच की मांग करते हुए, महापात्र ने कहा – ‘एएसआई तब तक चुप रहा जब राज्य सरकार ने श्री जगन्नाथ मंदिर जैसे संरक्षित स्मारक से 75 मीटर के भीतर मठों को ध्वस्त कर दिया और गड्ढों की खुदाई की। अगर एएसआई ने अपना काम ठीक से किया होता और पहले दिन से ही आपत्ति जताई होती तो यह विवाद नहीं होता।’

महापात्र ने आरोप लगाया कि ASI ने शुरू से ही इस परियोजना में सक्रिय रुचि ली है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ASI को परियोजना की जांच के लिए एक तकनीकी या विशेषज्ञ पैनल का गठन करना चाहिए था, लेकिन यह अभी तक नहीं बना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी एएसआई से सलाह मशविरा करके ऐसा पैनल बना सकती थी, लेकिन ऐसा दोबारा नहीं किया गया।

महापात्र ने ASI पर अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से पूरी न करने का आरोप लगाया। महापात्र का मानना है कि इसी कारण ये विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने का अधिकार होने के बावजूद इसने परियोजना को रोकने या निरीक्षण करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

महापात्र ने कहा कि जब उड़ीसा उच्च न्यायालय ने इस मामले को उठाया तो एएसआई के वकील चुप रहे। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ही एएसआई ने संयुक्त निरीक्षण में भाग लिया। उन्होंने कहा कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर के साथ किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए, चाहे वह सत्ता में पार्टी हो या विपक्ष में अब यह मुद्दा राजनीतिक ड्रामा में बदल गया है।

हालांकि, एएसआई के अधिकारियों ने महापात्रा के आरोपों पर टिप्पणी नहीं की। इस बीच, ओडिशा ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (ओबीसीसी), कॉरिडोर परियोजना को अंजाम देने वाली राज्य एजेंसी ने मंगलवार को ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) सर्वेक्षण किया। विभिन्न राजनीतिक दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को पुरी गोवर्धन पीठ शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से मुलाकात की और उनसे हस्तक्षेप करने और मंदिर और इसकी सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा को बचाने की मांग की।

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