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रुड़की:10 बच्चों के अब्बा ने दिए बीवी को 3 तलाक, बीवी ने लगाई गंगनहर में छलांग

प्रयाग भारत, रुड़की: हरिद्वार जिले के रुड़की में तीन तलाक देना शौहर को भारी पड़ गया. शौहर द्वारा बीवी को दिए गए तीन तलाक के बाद बीवी ने गंगनहर में छलांग लगा ली. पुलिस ने सूचना मिलते ही गंगनहर में रेस्क्यू अभियान शुरू किया. महिला की तलाश के लिए गंगनहर में  तीसरे दिन भी सर्च अभियान चल रहा है. अभी तक महिला का कुछ पता नहीं चल पाया है. पुलिस ने इस मामले में महिला के शौहर समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है.

पहली बीवी होते दूसरी से किया निकाह: जानकारी के मुताबिक रुड़की गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के सफरपुर गांव निवासी खुशनूद नामक व्यक्ति ने सहारनपुर निवासी साजिया नाम की एक युवती को धोखा देकर 9 वर्ष पूर्व निकाह किया था. आरोप है कि युवती का शौहर खुशनूद पहले से ही निकाहशुदा था. इस बात की जानकारी खुशनूद ने साजिया से छिपाई थी. जब साजिया को इस बात की जानकारी लगी, तो उसने इसका विरोध किया. इस पर खुशनूद ने साजिया के साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया.

विरोध करने पर दूसरी बीवी को दिया तीन तलाक: इसके बाद साजिया खुशनूद के घर पहुंची तो शौहर ने उसको तीन तलाक दे दिया. साथ ही अपने परिजनों के साथ मिलकर साजिया के साथ मारपीट कर दी और उसे घर से निकाल दिया. आरोप है कि साजिया शौहर से तीन तलाक मिलने पर डिप्रेशन में आ गई. तीन तलाक से परेशान होकर साजिया मंगलवार शाम गंगनहर में कूद गई. बताया गया है कि निकाह के बाद से उनके तीन बच्चे हैं. वहीं पुलिस के द्वारा साजिया की गंगनहर में तलाश की जा रही है. जिसकी तलाश के लिए जल पुलिस के गोताखोरों द्वारा गंगनहर में सर्च अभियान चलाया जा रहा है, हालांकि अभी उसका कुछ पता नहीं चल पाया है.

खुशनूद है 10 बच्चों का अब्बा: जिस खुशनूद नाम के शख्स ने अपनी दूसरी बीवी को तीन तलाक दिया है, उसके 10 बच्चे हैं. पहली बीवी से उसकी 6 बेटियां और एक बेटा है. वहीं गंगनहर में डूबकर लापता हुई दूसरी बीवी साजिया जिसे उसेन तीन तलाक दिया, उससे 3 तीन बेटे हैं.

भारत में तीन तलाक पर प्रतिबंध है: भारत में तीन तलाक गैरकानूनी है. 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया था. 2019 में संसद ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 पारित कर इसे अपराध घोषित कर दिया था. इस कानून के तहत, तीन तलाक देना एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है. तीन तलाक देने वाले को तीन साल तक की सजा हो सकती है.

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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