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मात्र 100 रूपए लेकर, बेटी-पत्नी को छोड़, आए मुंबई, फिर भी नहीं मिली फिल्म, पढ़िए राज बब्बर का संघर्ष वह दिल्ली में थिएटर करने के बाद अपनी जेब में सिर्फ 100 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे, लेकिन करियर के शुरुआत में ही उन्हें बड़ा झटका लगा था

मुंबई, महाराष्ट्र | बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर राज बब्बर अपनी दमदार अदाकारी के लिए मशहूर हैं। वह अपने करियर में अलग-अलग तरह के कई रोल निभाकर ऑडियंस का दिल जीत चुके हैं। सबसे ज्यादा लोगों ने सिल्वर स्क्रीन पर उनकी खलनायकी पसंद की है। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचना राज बब्बर के लिए आसान नहीं था।

क्योंकि उन्हें एक बड़ी फिल्म से बाहर कर दिया गया था। राज बब्बर ने खुलासा किया कि नमक हलाल फिल्म के लिए उन्हें कास्ट कर लिया गया था। सबकुछ फिक्स हो गया था, लेकिन जब वह मुंबई पहुंचे तो पता चला कि उन्हें फिल्म से निकाल दिया गया है।

राजश्री अनप्लग्ड के साथ इंटरव्यू के दौरान राज बब्बर ने बताया – ‘प्रकाश मेहरा ने मुझे 2 फिल्मों के लिए साइन किया था। वह ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की रिलीज के लिए दिल्ली आए थे। उन्होंने ‘नमक हलाल’ और एक दूसरी फिल्म के लिए मुझे कास्ट कर लिया था।’

उन्होंने आगे बताया – ‘मैंने उनसे (प्रकाश मेहरा) कहा कि आप मुझे बहुत बड़ा रोल दे रहे हैं। जो फिल्म विनोद खन्ना करने वाले थे, आप मुझे वो रोल दे रहे हैं, लेकिन मेरे पास वहां पर रहने के लिए कोई जगह नहीं है। मैं चाहता हूं कि मैं ये फिल्म कर रहा हूं, तो मुझे आप मुंबई में एक साल तक रहने के लिए जगह दे दीजिए। इसके बाद मेरे पास एक स्कूटर था, जिसे मैंने बेच दिया और घर का खर्च चलाने के लिए पैसे अपनी पत्नी को दे दिए। उस वक्त मेरी बड़ी बेटी जूही पैदा हुई थी। मैंने पत्नी से कहा कि मैं एक साल के लिए मुंबई जा रहा हूं।’

नमक हलाल फिल्म से धोना पड़ा हाथ
राज बब्बर ने बताया कि, ‘मैं अपनी जेब में 100 रुपये लेकर मुंबई पहुंच गया। उसके बाद मुझे नमक हलाल से निकाल दिया गया था क्योंकि बहुत सारे लोग मेरे साथ काम नहीं करना चाहते थे। मैंने प्रकाश मेहरा से कहा कि आपने मुझसे वादा किया था कि आप मुंबई में मेरे रहने के लिए व्यवस्था करेंगे। इसके बाद उन्होंने रहने के लिए मुझे एक कमरा दे दिया।’

फिर भी नहीं मानी हार
‘नमक हलाल’ जैसी बड़ी फिल्म से बाहर होने के बाद भी राज बब्बर ने हार नहीं मानी और स्ट्रगल शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्हें फिल्में लगीं और वह पॉपलुर होते गए। फिल्म इंसाफ का तराजू में राज बब्बर ने खतरनाक विलेन का रोल निभाया था, जिसके बाद वह रातोंरात स्टार बन गए थे। इसके बाद उन्होंने ‘निकाह’, ‘आज की आवाज’ जैसी तमाम फिल्मों मे काम करके अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया।

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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