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दिल्ली MCD चुनावों में नाक की टक्कर, पार्टियाँ खड़ी कर रहीं बड़े नेताओं की फ़ौज

नई दिल्ली | देश की राजधानी दिल्ली में नगर निगम चुनाव हैं। दिल्ली की गलियों में AAP, BJP, Congress और अन्य पार्टियों के झंडे नजर आ रहे हैं और झंडों के साथ नजर आ रहे हैं गलियों में प्रचार करते मंत्री, मुख्यमंत्री और सांसद। जो साबित कर रहे हैं कि ये कोई आम नगर पालिका चुनाव नहीं है बल्कि सभी दलों के लिए नाक की लड़ाई है। दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए 4 दिसंबर को वोटिंग होनी है इसके नतीजे 7 दिसंबर को जारी किए जाएंगे। आइए समझते हैं आखिर क्या वजह है कि दिल्ली MCD चुनाव आम नगर पालिका चुनावों से अलग है।

विश्व के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक MCD
दिल्ली नगर निगम विश्व के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक है. दिल्ली नगर निगम तकरीबन 2 करोड़ लोगों के लिए काम करता है. दिल्ली नगर निगम का एरिया 1,397 वर्ग किलोमीटर का है. दिल्ली में पहले उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी, तीन अलग-अलग नगर निगम थे. तीनों को मिलाकर कुल सीटें 272 थीं. अब 250 सीटें हो गई हैं. दिल्ली के तीनों नगर निगमों का विलय कर एक बना दिया गया है.

MCD का बजट
किसी भी तरह के विकास के लिए आपको बजट की जरूरत होती है. दिल्ली MCD का बजट 2022-23 के लिए 15,276 करोड़ रुपए है. इसके अलावा पांचवे दिल्ली वित्त आयोग ने यह निर्धारित किया था कि दिल्ली सरकार के कुल बजट का 12.5 फीसदी हिस्सा दिल्ली नगर निगम को जाएगा. इस आधार पर दिल्ली सरकार से भी MCD को 3 किस्तों में बजट मिलता है.

MCD के अधिकार?
जब नगर पालिका का जिक्र किया जाता है तो भारत की दो नगर पालिकाओं को सबसे ताकतवर माना जाता है एक BMC (बृहन्मुंबई नगर निगम) और दूसरी MCD (दिल्ली नगर निगम). जैसे मुंबई में BMC चाह ले तो सत्तारूढ़ सरकार के दमदार मंत्रियों के घर में भी तोड़फोड़ मचा सकती है, वैसे ही कुछ ताकत MCD की भी है.

MCD की ताकत झुग्गी झोपड़ियों, गलियों से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों तक एक जैसी है. नगर निगम के पास अस्पताल, बाजार से संबंधित अधिकार, पार्क, पार्किंग स्थल, प्राथमिक स्कूलों का संचालन, ड्रेनेज सिस्टम का प्रबंधन, टैक्स कलेक्शन, शवदाह गृहों के संचालन से संबंधित अधिकार हैं. स्ट्रीट लाइटिंग, रोड निर्माण से लेकर लोगों के परिवार रजिस्टर से संबंधित सारे अधिकार एमसीडी के पास हैं.एमसीडी के पास सारी स्थानीय ताकतें हैं. इन्हीं ताकतों की वजह से MCD चुनाव खास हो जाता है.

विधानसभा, लोकसभा चुनाव में जनता के मूड की झलक है MCD चुनाव
दिल्ली नगर निगम के मुद्दे लोकसभा और विधानसभा के मुद्दों से बेहद अलग होते हैं और दिल्ली की जनता ने बीते कुछ समय में ये साबित भी किया है कि वो इस बात को ध्यान में रखते हुए ही वोट कर रहे हैं मगर MCD चुनाव दिल्ली विधानसभा और लोकसभा के चुनावों के बारे में दिल्ली की जनता के रुख की ओर भी इशारा करते हैं.

2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. बीजेपी यह जानना चाह रही है कि मोदी मैजिक दिल्ली में बरकरार है या नहीं. AAP यह जानने की कोशिश में है कि क्या मुख्यमंत्री पद के बाद MCD पर भी जीत हासिल होगी? कांग्रेस भी जोर आजमाइश कर रही है कि किसी भी तरह से खोई हुई जमीन को वापस पाया जा सके.

MCD में सत्ता मतलब दिल्ली में काम करने में होगी सहूलियत
MCD का चुनाव जो भी पार्टी जीतेगी उसे दिल्ली में काम करने में आसानी होगी. मसलन अरविंद केजरीवाल की AAP अगर MCD चुनाव में जीत दर्ज करती है तो दिल्ली सरकार और MCD के काम में जो हितों के टकराव होते हैं उनसे निजात पाया जा सकता है.

शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भी दोनों के बीच टकराव नजर आता है. एमसीडी प्राइमरी शिक्षा का संचालन करता है, वहीं दूसरे ग्रेड के स्कूलों का संचालन दिल्ली सरकार करती है. जब दिल्ली सरकार प्राइमरी स्कूलों में दखल देती है तो एमसीडी के साथ टकराव सामने आते हैं.

अगर स्वास्थ्य के क्षेत्र की बात की जाए तो दिल्ली सरकार बड़े अस्पतालों का संचालन करती है, वहीं बड़े अस्पताल पूरी तरह से दिल्ली सरकार पर निर्भर होते हैं. टैक्स कलेक्शन में भी एमसीडी और दिल्ली सरकार के काम बंटे हुए हैं. एमसीडी वार्ड एरिया में टोल टैक्स कलेक्ट करता है, लगान के अधिकार भी एमसीडी के पास हैं. दिल्ली सरकार एक्साइज ड्यूटी, सर्विस और दूसरे विभागों से कर वसूलती है.

वहीं, 60 फीट से ज्यादा बड़ी सड़कों के निर्माण का अधिकार आमतौर पर दिल्ली सरकार के पास होता है, वहीं कम चौड़ाई की सड़कों के मरम्मत संबंधी अधिकार एमसीडी के पास होते है।

इस तरह के तमाम मुद्दे हैं जहां अभी दिल्ली सरकार और MCD आमने-सामने नजर आती हैं। इसलिए भी MCD में जीत हम साबित हो जाती है।

दिल्ली MCD चुनावों का प्रचार अपने चरम पर है, चुनावी वादों की मुनादी पीटी जा रही है। अब 7 दिसंबर को यह पता चलेगा कि जनता ने MCD की कमान किसके हाथों में सौंपी है।

 

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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