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बिहार : बेतिया में BJP के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल के घर पर हमला जिस समय हमला हुआ उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल घर ही मौजूद थे.

बिहार | अग्निपथ योजना के विरोध की आग भाजपा नेताओं के घर तक पहुंच गयी है. बेतिया में पहले उपमुख्यमंत्री रेणु देवी और उसके बाद भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल के अस्पताल रोड स्थित आवास पर उन्मादी भीड़ का कहर टूटा. सैकड़ों की संख्या में लाठी डंडे से लैस भीड़ ने प्रदेश अध्यक्ष के आवास पर जमकर पत्थरबाजी की जिसमें घर का शीशा चकनाचूर हो गया. गेट को तोड़ने का प्रयास किया गया जिसमें एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया. जिस समय हमला हुआ उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल घर ही मौजूद थे.

मौके पर पहुंचे एसपी ने किसी तरह भीड़ को खदेड़ा. इसके बाद संजय जायसवाल ने बताया कि उनके घर को उड़ाने की साजिश थी. भीड़ द्वारा उनके घर पर डीजल और पेट्रोल छिड़कर जलाने का प्रयास किया गया. संजय जायसवाल ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि जैसी कार्रवाई प्रशासन को करनी चाहिए थी वैसी कार्रवाई प्रशासन ने नहीं की.

डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि मेरे घर पर जो हमला हुआ है उसका सीसीटीवी मौजूद है. घर को आग लगाने का प्रयास किया गया है. डीजल और मोबिल फेका गया है. मेरे घर को उड़ाने की साजिश थी. मेरे घर पर जो हमला हुआ है वे आर्मी के कैंडिडेट तो बिल्कुल नहीं थे. मैंने 100 लोगों की पहचान की है. बगल के घर से भी हमला किया गया है. प्रशासन की कार्रवाई संतोषप्रद नहीं है. इस तरह की घटनाएं बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है.

हालांकि, संजय जायसवाल ने विरोध कर रहे युवाओं को समझाने का भी प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि युवा किसी बहकावे में न आएं क्योंकि अन्य देशों की तरह भारत भी अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करना चाहती है; और इसके लिए अपने नागरिकों को ट्रेंड करना चाहती है. आगे उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ युवाओं को मिलेगा जो आने वाले समय मे पता चलेगा.

भाजपा अध्यक्ष ने इसके अलावा भी युवाओं में देश के प्रति कोई युवा काम धंधा करना चाहता है तो 25 लाख के अलावा 25 लाख की योजना 50 लाख मिलेगा. यूक्रेन और रसिया के बीच जैसी घटनाएं हुई हैं तो एक रिजर्व पीढ़ी तैयार करने की कवायद है.

संजय जायसवाल ने कहा कि दुनिया में हर जगह होता है कि देश में एक रिजर्व आर्म्ड फोर्सेज की पीढ़ी तैयार किया जाता है. हमारे सामने इजरायल और ब्रिटेन जैसे कई उदाहरण हैं. इस योजना के तहत 4 साल में ही काम धंधा का अवसर मिलता है. ग्रेजुएशन की डिग्री मिल जाएगी. शॉर्ट सर्विस कमिशन वालों को प्राइवेट कंपनियां भी तरजीह देती हैं.

 

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Budget 2022 : मनमोहन बनाम मोदी, जनिए किस सरकार ने वसूला ज़्यादा TAX नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगी. बजट में एक आम आदमी की नजर इनकम टैक्स में छूट पर ही रहती है. कोरोना महामारी के चलते आम आदमी की कमाई बहुत प्रभावित हुई है, इसलिए इस बार आम आदमी इनकम टैक्स कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रहा है. मोदी सरकार में बढ़ी टैक्स-फ्री इनकम मोदी सरकार में टैक्सपेयर्स को राहत देने की कोशिश हर बजट में की गई है. मनमोहन सरकार (Manmohan Government) में सालाना 2 लाख तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था. 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार (Modi Government) ने अपने पहले ही बजट में इसकी सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख तक कर दी थी. यानी, सालभर में अगर 2.5 लाख रुपये तक कमाते हैं तो कोई टैक्स नहीं देना होगा. आया नया इनकम टैक्स सिस्टम 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया था, उसमें उन्होंने एक नई टैक्स व्यवस्था पेश की थी. नई स्कीम में ये कहा गया कि अगर आप सारी छूट छोड़ देते हैं तो आपको कम टैक्स देना होगा. नई स्कीम में नए स्लैब भी जोड़े गए. वहीं, पुरानी स्कीम उन लोगों के लिए थी जो छूट का लाभ लेते थे और कई जगह निवेश करते थे. मोदी सरकार में इनकम टैक्स को लेकर क्या-क्या बदलाव हुए? ये जानने से पहले ये समझना जरूरी है कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कितनी कमाई पर कितना टैक्स लगता था. इसे आप इस टेबल से समझ सकते हैं. मोदी सरकार में इनकम टैक्स में हुए बदलाव 2014 : टैक्स छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 2.5 लाख से 3 लाख हुई. साथ ही सेक्शन 80C के तहत, टैक्स डिडक्शन की लिमिट 1.1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई. 2015 : सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट. 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया. 2016 : सालाना 5 लाख से कम कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई. घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट 24,000 से बढ़ाकर 60,000 की गई. घर खरीदने वालों को 35 लाख रुपये तक के लोन पर ब्याज के लिए 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई. 1 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज 15 फीसदी किया गया. 2017 : सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये की टैक्स छूट दी गई. सालाना 2.5 लाख से 5 लाख तक कमाने वालों के लिए टैक्स रेट 10% से घटाकर 5% किया गया. 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया. 2018 : सैलरीड क्लास वालों के लिए 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया. इसके बदले में 15,000 रुपये के मेडिकल रिइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म की गई. सेस 3% से बढ़ाकर 4% किया गया. वरिष्ठ नागरिकों की 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम को टैक्स छूट दी गई. साथ ही 50,000 रुपये तक मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट क्लेम करने की भी सुविधा दी. 2019 : टैक्स रिबेट की लिमिट 2,500 से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 किया. किराए पर टीडीएस की सीमा 2.40 लाख रुपये की गई. पहले ये सीमा 1.80 लाख रुपये थी. बैंक या डाकघरों में जमा रकम पर आने वाले 40,000 रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया. 2020 : नई इनकम टैक्स स्कीम की घोषणा की गई. अब टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स स्लैब के दो ऑप्शन हैं. पुरानी स्कीम में सारी छूट का लाभ मिलता है, लेकिन नई स्कीम में किसी छूट का लाभ नहीं मिलता है. अगर किसी भी तरह की कोई छूट नहीं लेते हैं तो नई स्कीम से टैक्स जमा कर सकते हैं. 2021 : 75 साल से ज्यादा उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने की छूट मिली, बशर्ते उनकी कमाई पेंशन और बैंक से मिलने वाले ब्याज से होती हो. पिछले बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई थी.

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